
अजमेर ईद उल अजहा के मौके पर एक व्यक्ति ने शाकाहारी भंडारे का आयोजन किया। इस अनूठी पहल के तहत अब तक जहां कच्चे गोश्त का वितरण किया जाता था, वहां अब हलवा, पूड़ी और सब्जी बांटी गई।बेट्री व्यवसायी सलीम भाई कुरैशी ने बताया कि वे लगातार 10 सालों से कुरान समेत विभिन्न धर्मों की किताबों का अध्ययन कर रहे हैं।
विभिन्न मजहबों के प्रवचन और व्याख्यान भी सुने। कई धार्मिक चैनलों को लंबे समय तक देखा। अंत में उन्होंने शाकाहार को अपना लिया। कुरैशी ने बताया कि उनकी परिवार की बरसों से परंपरा चली आ रही है कि वे बकरा ईद के मौके पर करीब 500 लोगों को कच्चा गोश्त वितरण करते हैं।
मगर इस बार उन्होंने इसमें परिर्वतन कर शाकाहारी भंडारे का आयोजन किया। इससे पूर्व 5 साल पहले वे अपनी बेटी नाजमीन तथा 2 साल पहले बेटे वसीम के निकाह में भी शाकाहारी व्यंजनों की दावत अपने रिश्तेदारों, परिचितों एवं दोस्तों को दे चुके हैं। हालांकि यह परिवर्तन करने के पहले अपने ही लोगों को बमुश्किल समझना पड़ा।
मगर वे अपनी इस सोच पर अटल रहे।
छोटा बेटा इमरान भी शाकाहारी है। इसलिए उसे बचपन से ही जैन शब्द से वे पुकारते हैं। केकड़ी के साकरिया गांव में उनके गुरु मास्टर ब्रह्मदत्त शर्मा से वे आध्यात्म पर चर्चा करते थे। इसी के प्रभाव से वे शाकाहारी हो गए।
( सौ : दैनिक भास्कर)





