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ईश्वर ने इंसान के लिए शाकाहार बनाया है और मानव के लिए शाकाहार उत्तम है। मांसाहारी और शाकाहारी को ईश्वर ने अलग-अलग विशेषता देकर भेजा है। बर्नाड शाॅ ने कहा मांसाहार करना अपने पेट को कब्रिस्तान बनाने के समान है। पशुओं के प्रति मन में दया का भाव होना चाहिए, जीवमात्र में ईश्वर का अंश है।

हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी भारत का गौरव है। हिंदी अपने आप में अपार है। भारत माता की पहचान है, शब्दों का सागर है। आज हिंदी को अपमान का पर्याय बना दिया है। जब किसी तो अपमानित करते हैं तो कहते आज मैंने उसकी हिंदी कर दी। अरे अंग्रेजी, फारसी क्यों नहीं करते। राष्ट्रीय भाषा के अपमान पर संतश्री भीमाशंकर शर्मा ने श्रीमद् भागवत कथा में यह बात कही। उन्होंने कहा देश में भाषा का अपमान हो रहा है, देश चुप बैठा है। नेता बोल नहीं रहे हैं और संविधान की आत्मा हिंदी रो रही है। हमें राष्ट्र, राष्ट्रीय प्रतीक, धर्म, संस्कृति और संतों का सम्मान करना होगा। मां बच्चों को बचपन से ही राष्ट्र का सम्मान करना सिखाए। बच्चों को दाता, ज्ञाता और वीर बनाए। संत हमारी संस्कृति की धूरी होते हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। देश को इंडिया न कहें, भारत कहें। भारत को माता कहते हैं और माता को स्नेह, श्रद्धा और आदर के भाव से देखा जाना चाहिए। संत और जल को हमेशा सहज होना चाहिए। अगर संत हाईप्रोफाइल हो गए तो गरीब श्रद्धालु की पहुंच से दूर हो जाएंगे। संताें को सरलता से लोगों से मिलना चाहिए ताकि समाज का सुधार हो सके। कथा में ध्रुव चरित्र के माध्यम से भक्ति का संदेश दिया और भागवत को जीव कल्याण का मार्ग बताया। गीता पाठ इंसान को आकांक्षा, माया, मोह और लालच के बंधनों से काटती है। ईश्वर और जीव के मिलन का रास्ता बताती है। जीवन के अंतिम समय में गीता सुनाई जाती है। इंसान को गीतापाठ हमेशा सुनना चाहिए।

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